सयुंक्त परिवार में सामंजस्य कैसे बनाये? HOW TO MAKE HORMONY IN JOINT FAMILY ?

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how to make hormony in joint family

आज के समय में सयुंक्त परिवार(Joint Family) बिखरता जा रहा है. और परिवार में सामंजस्य बैठा पाना मुश्किल होता जा रहा है. आज के समय में सयुंक्त परिवार सामंजस्य बैठा पाना किसी चुनौती से कम नहीं है.
परिवार में कुछ न कुछ बातो को लेकर विवाद होता रहता है. जहाँ एक ओर पिता -पुत्र झगड़ते है, वही दूसरी ओर भाई- भाई में भी अनबन होता है. परिवार में सास-बहु के  रिश्ते में खटास आ  जाती  है. परिवार के लोगो का आपसी तालमेल न होने के कई कारण हो सकते है.
जैसे- परिवार के सदस्यों का  अलग -अलग विचार होना  , पारिवारिक जिम्मेदारी को न निभाना, सिर्फ एक सदस्य पर आर्थिक जिम्मेदारी होना इत्यादि.

सयुंक्त परिवार क्यों जरुरी होता है? WHY JOINT FAMILY NECESSARY ? 

परिवार में सामंजस्य न होना धीरे-धीरे विकट समस्या बन जाता है और परिवार बिखर कर कई टुकड़ो में बट जाता है. इसका नुकसान हमें तत्काल दिखाई नहीं देता लेकिन लम्बे समय के बाद दिखाई पड़ता है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान परिवार के छोटे बच्चो पर पड़ता है. बच्चे सयुंक्त परिवार के प्यार  से वंचित  हो जाते है.बच्चे बड़े होकर सयुंक्त परिवार के बजाय एकल परिवार में रहना पसंद करते है. जिसका खामिजा आपको भुगतना पड़ सकता है. आज कि हालत पर गौर करे और कुछ बातो का ध्यान रखे तो परिवार में सामंजस्य बनाया जा सकता है.

1 परिवार का मुखिया निष्पक्ष हो -


family head
परिवार  चलाने  में मुखिया का सबसे अहम् योगदान होता है. मुखिया के आचार  -विचार से पूरा परिवार प्रभावित होता है. ऐसे स्थिति में अगर मुखिया कोई गलत निर्णय लेता है  या पक्षपात पूर्ण निर्णय ले लो तो  परिवार टूटने की स्थिति आ जाती है. मुखिया को हमेशा किसी एक ही सदस्य के बात को महत्व नहीं देना चाहिए. अगर किसी बात को लेकर मनमुटाव हो तो दोनों सदस्य के बातों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय देना चाहिए. इससे परिवार के सदस्यों में मुखिया के प्रति सम्मान बना रहता है और परिवार  में छोटे- मोटे झगड़े नहीं होते.

2. परिवार का हित सबसे पहले-

family first
परिवार का मुखिया का सबसे पहला कर्तव्य होता है कि वो परिवार के हित को सबसे पहले ध्यान रखे बजाय खुद के . परिवार के मुखिया को ऐसा कोई फैसला या कदम नहीं उठाना चाहिए जो परिवार के हित में न हो. क्यूंकि मुखिया सभी के आदर्श होते है, अगर मुखिया परिवार के हित को ज्यादा प्राथमिकता देगा  तो परिवार के सदस्यों का परिवार के प्रति सकारात्मक रवैया होगा और  सभी लोग भी ऐसा ही करेंगे.

3. सिर्फ एक पर ही आर्थिक बोझ न डाले-

financial burden
कई परिवारों में देखा गया है कि सिर्फ एक ही व्यक्ति परिवार के खर्च का वहन करता है, जिससे अक्सर परिवारों में पैसो को लेकर लड़ाई झगड़े होते रहते है. अतः परिवार के मुखिया को पारिवारिक खर्च को बोझ सिर्फ एक ही सदस्य पर नहीं डालना चाहिए. बल्कि आर्थिक बोझ को  परिवार के सभी कमाने वाले सदस्यों को बीच बाँट दे. इससे पैसे को लेकर होने वाले अनावश्यक मतभेद खत्म हो जायेगा.

4. प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपे-

work distribution
परिवार में कई सदस्य ऐसे होते है जो पारिवारिक जिम्मेदारी से दूर भागते है. परिवार में होने वाले मतभेद के लिए ये भी बहुत बड़ा कारण होता है. ऐसे समय में मुखिया को परिवार के सभी सदस्यों को परिवार की अलग- अलग जिम्मेदारी सौंप देना चाहिए. इससे बेवजह किसी एक को परेशानी नहीं होगा और सभी लोग परिवार के प्रति जिम्मेदारी भी हो जायेंगे.

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5. अभिव्यक्ति की आजादी-

freedom to speak
कई परिवारों में ऐसा होता है कि सिर्फ कुछ लोगो को ही बोलने का अधिकार होता है. वे लोग ही अपने हर जिद पूरी करवा भी लेते है. परिवार के मुखिया को परिवार के हर सदस्य को बोलने को मौका देना चाहिए. हर सदस्य के इच्छा कि पूर्ति हो, इसका ध्यान रखना मुखिया कि जवाबदारी होता है.इससे  परिवार का कोई भी सदस्य स्वम् को उपेक्षित नहीं समझता. परिवार में अभिव्यक्ति कि आजादी से परिवार खुशनुमा बन जाता है और  किसी भी सदस्य के मन में कोई कडुवाहट नहीं होता है.
                 
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