प्रेरक प्रसंग-चिंता सरल काम को भी कठिन बना देती है । ANXIETY MAKES THE WORK COMPLICATED.

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ANXIETY MAKES THE WORK COMPLICATED.
चिंता सरल काम को भी कठिन बना देती है
जीवन में छोटी-मोटी परेशानियों (Problems) का आना-जाना आम बात है. कुछ लोग इन परेशानियों को बढ़िया तरीके से सुलझा लेते है, लेकिन अधिकतर लोग ऐसे होते है जो दैनिक जीवन में होने वाले छोटी -छोटी परेशानियों के कारण चिंतित (Worried) रहते है. इसी चिंता (Anxiety) के कारण जीवन में सभी प्रकार के सुख-सुविधाएं होने के बावजूद दुःखी रहते है. 
एक कहावत है -"चिंता चिता के सामान है"  जो व्यक्ति को धीरे-धीरे चिंता की आग में जलकर मानसिक और शारीरिक रूप से खोखला कर देता है. कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार से चिंता से ग्रसित हो तो उसे छोटा -छोटा कार्य भी कठिन (complicated) लगता है. चिंता व्यक्ति की सूझबूझ को ख़त्म कर देता है जिसके कारण आसान कार्य करने में हमें परेशानी होती है और मुश्किल लगती है.

एक राजा की चिंता-

kings anxiety
बहुत समय की बात है एक महिपाल नाम का  राजा हुआ करता था. उसे अपने विशाल और संपन्न राज्य में राज्य करते लगभग 15 वर्ष हो चुके थे. अचानक उस राज्य में अकाल पड़ा. अकाल के कारण राजा को लगान नहीं मिला. अब राजा चिंतित हो गया की राज्य का खर्च कैसे कम किया जाये जिससे भविष्य में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े. अगर भविष्य में ऐसे ही अकाल पड़ जाये तो क्या होगा. साथ ही साथ पडोसी राजाओं के हमले का भी डर होने लगा. इस तरह राजा अनेक प्रकार से चिंता से ग्रस्त हो गया.


राजा की नींद उड़ी-

राजा लगातार चिंता करने लगा जिसके कारण उन्हें नींद नहीं आती थी. नींद पूरी न होने कारण भूख भी काम लगती थी. शाही मेज पर 56 प्रकार के पकवान परोसे जाते लेकिन राजा चिंता के कारण कुछ न खा पाता. ठीक से नींद न होने और न खाने के कारण राजा कमजोर होने लगा था. राजा अपने बगीचे के माली को देखता था जो बड़े स्वाद से  चटनी में 8 से 10 रोटी खा जाता था

राजा की मानसिक पीड़ा-

एक दिन अचानक राजा के गुरु राज दरबार मे आते है. राजा की स्थिति देखकर राजा से कारण पूछते है. राजा अपनी सारी बात बताते है कि  वह क्यों खाना खा नहीं पाता और कैसे उसका माली चटनी में भी 10 रोटी खा जाता है. गुरु राजा से कहते है अगर तुम्हें नौकरी अच्छी लगती है तो नौकरी कर लो और ये राज दरबार मुझे सौप दो. राजा तैयार हो जाता है. फिर गुरु कहता है कि- मैं साधु हूँ जो आश्रम में रहता हूं. मुझे इस राज्य को चलाने के लिए एक नौकर चाहिए. एक काम करो वह नौकरी तुम कर लो. तुम पहले के जैसे ही शासन करोगे और राजमहल में निवास करोगें यहीं तुम्हारा नौकरी होगा.

राजा बन गया नौकर-

राजा ने गुरु कि बात मान ली और अपने काम को नौकरी के जैसे करने लगा. फर्क कुछ नहीं था. काम वही था, लेकिन अब वह फालतू कि चिंताओं से लदा नहीं था. चिंताओं से मुक्त होने के कारण अब राजा को खूब नींद आती और खूब भूख लगती. कुछ महीनो बाद उसके गुरु आये. उन्होंने राजा से पूछा  कि अब नींद और भूख लगती है. राजा ने कहा- मालिक अब खूब भूख लगती है और आराम से सोता हूँ. 


प्रसंग से सीख-

गुरु ने राजा को आराम से बिठा कर समझाया कि देखो सब कुछ पहले जैसा ही चल रहा है. जो काम तुम पहले कर रहे थे वो काम आज भी कर रहे हो. फर्क सिर्फ इतना है कि पहले तुम जिस काम को बोझ समझकर रहे थे और व्यर्थ कि चिंता में लदे थे, यही तुम्हारे परेशानियों का सबसे बड़ा करना था. 
हमें यह जीवन सुखपूर्वक अपने कर्तव्यों को पूरा करने के  लिए मिला है. किसी भी चीज को अपने ऊपर बोझ समझकर व्यर्थ कि चिंता करने के लिए नहीं. काम कोई भी हो, चिंता आसान से आसान काम को कठिन बना देती है. चिंता व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बना देती है और छोटे कामो को भी पहाड़ जैसा समझकर चिंता में पड़ जाता है. जो भी काम है बिना चिंता किये करेंगे तो  जीवन में सुखी रहेंगे.
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