प्रेरक कहानी- दान की महिमा। INSPIRING STORY-THE GLORY OF CHARITY

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एक बात हमेशा से कहा जाता है कि अगर आप कोई चीज किसी को दान  देते है तो भगवान आपको उसे कई गुना बढ़ाकर आपको वापस करता है. दान की महिमा बहुत बड़ी है.
daan ki mahima
प्रेरक कहानी- दान की महिमा
ये बात आज से कई साल पहले भी सत्य था और आज भी है, अगर आप आज भी आजमाना चाहते है तो आजमा कर देख सकते है. हम सभी के जीवन में ऐसे कई उदाहरण खोजने पर मिल जायेंगे जो इस बात को प्रमाणित कर देंगे कि जो चीज हम दुसरो को दान देते है वो कई गुना बढ़ कर हमें अपने जीवन में दुबारा  मिलती है. साथ ही साथ  भगवान हमारे दान देने के सामर्थ्य को और बढ़ा देता है जिससे हम और कई लोगो का भला कर सके.आज मैं ऐसे ही दान की महिमा को बताने वाले एक प्रेरक कहानी आपसे साझा कर रहा हूँ.

बाली और मनु की कहानी 
daan ki mahima kishan

एक समय कि बात है बाली और मनु नाम के दो किसान रहते थे. दोनों एक ही गाँव में रहते थे और खेती बाड़ी करके अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. दोनों खूब मेहनत करते और अपने परिवार का भरण-पोषण करते. लेकिन बाली और मनु के स्वभाव और नजरिये में बहुत फर्क था. 

बाली का स्वभाव 

एक ओर बाली अपने द्वार में आये मेहमान का पूरी आदर के साथ स्वागत करता था. जो उनसे बन पड़े रुखा सूखा खिला कर उन्हें भेट स्वरुप कुछ देकर विदा करता था. इससे बाली को बहुत आत्मसंतुष्टि मिलती और मन ही मन भगवान को धन्यवाद भी देता कि आज वो किसी के काम आया. 

मनु का स्वभाव

दूसरी ओर मनु अपने द्वार में आये मेहमान का बेमन से और लालच वश स्वागत करता था. मनु कोशिश करता था कि द्वार पर आये मेहमान को देने के बदले उनसे कुछ मिल जाये तो जीवन में आनंद  आ जाये. अगर जीवन में कभी किसी मेहमान को कुछ देना पड़ जाता था तो मनु उदास हो जाता था. उसकी खुशी गायब हो जाती थी और  मन ही मन उस आये मेहमान को बुरा-भला कहता था.


अकाल कि स्थिति-

एक वर्ष अचानक बाली और मनु के गांव में अकाल पड़ा. खाने को कुछ नहीं था. दोनों बहुत चिंतित थे कि क्या होगा. इसी बीच बाली के घर एक मेहमान आता है. बाली के पास कुछ न होने के कारण वह मेहमान का आव-भगत नहीं कर पाता है, मेहमान के सामने  हाथ जोड़कर क्षमा मांगता है कि इस विकट अकाल में उसे भोजन नहीं करा पायेग.  मेहमान का घर से बिना खाये और बिना भेंट के जाने से बाली को बहुत बुरा लगता है.वह मन से भगवान से क्षमा मांगता है कि वो आये मेहमान का ठीक तरीके से स्वागत नहीं कर सका, इसके लिए उसे क्षमा करे.
वही मनु अपने द्वार में आये मेहमान को दूर ही भगा देता कि हमारे घर में ही खाने को कुछ नहीं है तो आपको क्या खिलाएंगे. कई वर्षो तकअ काल के वजह से बाली और मनु दोनों कि मृत्यु जो जाती है. 

भगवान से वरदान-

मृत्यु के बाद बाली और मनु स्वर्ग जाते है जहां उन्हें भगवान मिलते है. भगवान दोनों से उनके जीवन के बारे में पूछते है और कहते है अगर कोई इच्छा अधूरी रह गयी हो तो बताओ.
मनु लालच वश तुरंत बोल पड़ता है कि- भगवान किसान था तो  घर में बहुत मेहमान आये करते थे और उनके आव-भगत और भेंट देने के बाद मेरे पास कुछ भी नहीं बचता था. इसलिए अगले जन्म में ऐसा कीजियेगा कि मुझे किसी को कुछ देना न पड़े. बल्कि लोग मुझे दे. 
उसके बाद भगवान बाली से पूछे कि तुम भी अपनी इच्छा बताओ. बाली कहते है कि- भगवान किसान था और जब अकाल पड़ा तो घर पर आये मेहमान का न मैं ठीक से स्वागत कर पाया और ना ही उनको कोई भेंट स्वरुप कुछ दे सका. इसलिए मेरी सिर्फ एक ही इच्छा है कि अगले जन्म में कोई भी मेरे घर से भूखा और बिना भेंट के न जाये.
भगवान ने दोनों को आशीर्वाद देते हुवे कहा अगले जन्म में आप दोनों कि इच्छा पूरी होगी. आप दोनों जैसा जीवन चाहते है वैसा ही आपको मिलेगा.


बाली मनु का पुनर्जन्म-

भगवान के वरदान से दोनों एक ही राज्य  में जन्म लेते है. मनु कि इच्छा थी कि उससे किसी को कुछ देना न पड़े बल्कि लोग उसे दे इसलिए वह  भिखारी के घर पैदा होता  है और जीवन भर  दुसरो से मांगता फिरता है. 
वल्कि बाली के दान करने कि इच्छा के कारण वह राजा के घर में पैदा होता है और आगे चलकर राजा बनता है.
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दोस्तों आप इस कहानी से दान की महिमा को भली भांति समझ गये होंगे. दान देने कि प्रवृत्ति ने बाली को अतुल्य धन का मालिक बना दिया.
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