प्रेरक कहानी- थोड़े एक्स्ट्रा काम की कीमत । COST OF LITTLE EXTRA WORK

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कई बार जब हमें जीवन में कुछ एक्स्ट्रा मिलता है तो कितना बढ़िया लगता है. लेकिन सोचने वाली बात यह है की हममें से कितने लोग अपने काम में एक्स्ट्रा देते है.
प्रेरक कहानी- थोड़े एक्स्ट्रा काम की कीमत
प्रेरक कहानी- थोड़े एक्स्ट्रा काम की कीमत
धीरे-धीरे लोगो की मानसिकता में ये बात घर कर रही है कि उसे हर चीज में एक्स्ट्रा मिले लेकिन उसे कुछ एक्स्ट्रा किसी को ना देना पड़े. आज कि स्थिति में एक्स्ट्रा देने कि बात को बहुत दूर, लोग अपने काम में 70% भी नहीं देते है.  काम में  थोड़ा एक्स्ट्रा करने की आदत  हमारे  और दूसरे के जीवन में बहुत बड़ी बदलाव ला सकता है . आज मै आपसे ऐसे अपने काम में  थोड़ा एक्स्ट्रा करने वाले पेंटर की  एक प्रेरक कहानी शेयर कर रहा हूँ.

नाविक की कहानी (Story of Sailor)

एक समय की बात है एक सरजू नाम का नाविक रहता था. वह बहुत मेहनती और ईमानदार था. रोज सुबह अपने काम पे  चला जाता और दिन भर कड़ी मेहनत के बाद घर आता. सरजू को अपने पत्नी और बच्चो से बहुत प्रेम था. वह उनके साथ जीवन का आनंद ले रहा था. ऐसे करते कई वर्ष बीत गए. एक दिन सरजू सोचा की नाव बहुत पुरानी हो गयी है क्यों न इसे पेंट कराके फिर से इसे नया रूप दिया जाये.


सरजू ने पेंटर को बुलाया (Sarju called Painter)

सरजू ने नाव को नया करने के लिए एक पेंटर को  बुलाया. पेंटर को बुलाकर सरजू ने बताया की उसे क्या करना है. पेंटर ने नाव को देखा उसके बाद कहा कि-उसे काम करने में 2 दिन का समय लगेगा. सरजू ने कहा कि नाव पेंट करने का वह कितना मेहताना  लेगा. पेंटर कहता इस काम के लिए वह 5000 /-  रूपये लेगा. 

पेंटर ने काम शुरू किया (Painter started work)

पेंटर अपने काम को बहुत लगन से करता था. वह दूसरे दिन से ही नाव को पेंट करने के काम में लग जाता है. काम करते वक्त अचानक उसकी नजर नाव की छेद पर जाती है. पेंटर थोड़ा सा एक्स्ट्रा काम करते हुवे उस नाव की छेद को भर देता है और अपना पूरा काम करके चला आता है. 

नाव में छेद (Hole in the Boat)

अगली सुबह सरजू पेंटर के पास जाता है और उसे उसके काम कि कीमत का एक चेक देता है. पेंटर चेक में लिखे  100000/-  रुपये को देखकर हैरान हो जाता है. 
पेंटर कहता है कि सर मैंने तो इतना नहीं कहा था. मेरे काम के सिर्फ 5000/- रुपये  बनते है. सरजू ने पेंटर से कहा कि उस दिन तुम्हारे काम करने के बाद मैं नदी तट पर पंहुचा. वहाँ देखता हूँ तो मेरा नाव गायब था. मैंने आस-पास के लोगो से पूछा कि मेरा नाव कौन ले गया है. तब लोगो ने बताया कि आपके बच्चे और पत्नी सैर करने के लिए ले गए है. मै उसी वक्त निढाल होकर जमीन पर गिर गया. मैंने सोचा कि मैंने अपना पूरा परिवार खो दिया है क्यूंकि मैं जानता था कि नाव में छेद है, जिसे मै पेंट कराने के बाद ठीक कराने कि सोच ही रहा था. मै सुध बुध खो बैठा था. 


फिर  अचानक देखता हूँ कि मेरे बच्चे और पत्नी दूर से मजे करते हुवे चले आ रहे है. मुझे आश्चर्य हुवा कि छेद वाली नाव डूबी कैसे नहीं. जब वे लोग मेरे पास आये तो देखता हूँ कि नाव की छेद भरी हुवी है. मैं समझ गया कि ये तुम्हारा ही काम है.

एक्स्ट्रा काम कि कीमत (Cost of little extra work) 

पेंटर कहता है कि पेंट करते वक्त मुझे छेद दिखा तो मैंने उसे जरुरी समझकर भर दिया. सरजू कहता है कि आपके इसी गुण कारण मेरा परिवार खोते-खोते बच गया. आपके काम में कुछ एक्स्ट्रा करने कि कीमत है ये 100000/- रुपये .अगर उस दिन तुम नाव की छेद को  मेरा काम नहीं है करके छोड़ देते तो मेरा पूरा परिवार नदी में बह जाता. मेरे परिवार को बचाने के लिए एक छोटा कीमत है.
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