ओवर थिंकिंग से कैसे बचे? HOW TO STOP OVERTHINKING?

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ओवरथिंकिंग - आपके जीवन में उन  समस्याओं को  पैदा करने की कला है जिसका वजूद आपके जीवन में था ही नहीं. 
मैंने पिछले पोस्ट "कहीं आप भी ओवर थिंकिंग के शिकार तो नहीं" में बताया था कि ओवर थिंकिंग क्या होती है. ओवर थिंकिंग के कारण और नुकसान को बताया. अगर आप वो पोस्ट नहीं पढ़े तो एक बार जरूर पढ़े.
overthinking se kaise bache ?
ओवर थिंकिंग से कैसे बचे?
हम सभी लोग किसी काम को करने से पहले उसके पक्ष और विपक्ष के बारे में ध्यान से सोचते है और निर्णय लेते है कि वो काम करे कि नहीं. लेकिन अधिकांश समय हम किसी बात को जरुरत से ज्यादा सोचते है. सोते-जागते, उठाते-बैठते, बस एक ही बात को सोचते रहते है. इससे हम Overthinking  के ओर बढ़ते चले जाते है. रात-दिन एक ही बात पर गंभीरता से सोचने से हमें मानसिक तनाव ही मिलता है. मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि कोई भी तनाव में रहना पसंद नहीं करता है. लेकिन फिर भी हम सबके जीवन में तनाव है. इन सबका मुख्य कारण है अत्यधिक सोच (Overthinking)


अत्यधिक सोच से बचने के उपाय (Tips to Stop Overthinking)

ओवर थिंकिंग कि समस्या  को ज्यादा भयावह करने के पीछे हमारा ही हाथ होता है. हम ही छोटी बात को पहाड़ जैसा बड़ा कर डालते है. अगर हम कुछ बातो और तकनीक का उपयोग करें तो खुद को ओवर थिंकिंग के शिकार होने से बचा सकते है.

1. पुरानी बातो को सोचना बंद करें-

सबसे पहले पुरानी बातें जो दुखदायी हो उसे याद करना छोड़ दे. दुःख के पल हमारे वर्तमान को भी ख़राब करते है. अगर आप बार-बार दुःख या पुराने बातों को सोचते रहेंगे तो वर्तमान में दुविधा में फंसे रहेंगे और दिमांग में विचार चलते रहेंगे. 

2.अच्छे पलों को याद करें- 

ओवर थिंकिंग से बचने का दूसरा तरीका है कि आप जीवन के अच्छे पलों को याद करें. इससे आपका मन प्रसन्न रहेगा.  आपके अंदर नकारात्मक भाव नहीं आएगा और जिंदगी के प्रति आपका रवैया हमेशा सकारात्मक बना रहेगा. अक्सर नकारत्मक विचार ही हमें दुविधा में डाले रहता है. 

3. मन पसंद काम करें

ओवर थिंकिंग  से बचने के लिए अपने पसंद का काम चुने. पसंदीदा काम करने से आप पूरी तरह से उस पर ध्यान लगा पाएंगे और आपके विचारों की गति रुक जाएगी. आप अपने पालतू जानवर के साथ भी खेल सकते है. इससे आपको पता चलेगा कि दुनिया कितनी सुन्दर है. 

4. अपने जीवन कि प्राथमिकता खुद तय करें 

अक्सर ऐसा होता है कि हमें खुद पता नहीं होता कि हम क्या चाहते है. ऐसे में मन दुविधा में फंसा रहता है. जिसके कारण हम दुसरो को देखकर हमें क्या चाहिए निर्धारित करते है जो आपको ओवर थिंकिंग के ओर ले जाते है. इसलिए कोशिश करें कि खुद कि प्राथमिकता स्वयं ही  तय करें. 

5.खुद कि निंदा करने से बचे-

कभी भी किसी परिस्थिति के खुद कि निंदा न करें. ऐसे करते रहने से मन की बेचैनी और हमारे दिमाग की उलटी सोच दोनों बढ़ने लगती है. अगर परिस्थिति वश कोई भी चीज घट गयी हो तो उसे स्वीकार करें.  अगर खुद गहराई से उस घटना पर विचार करेंगे तो आप पाएंगे कि आप छोटी-छोटी बातों के लिए बहुत ज्यादा परेशान हो रहे थे. 


6.  वर्कलोड न ले-

यह बात उतना आसान नहीं है. लेकिन वर्क लोड लेने से आपके काम करने कि क्षमता पर असर पड़ता है.एक अध्ययन के अनुसार हम  शांत मन से जितना काम 02 घंटे में कर लेता है उसे एक परेशांन व्यक्ति को दिया जाये तो  वो दिनभर में भी नहीं कर सकता.  इसलिए काम को एक -एक करके करते जाये, व्यर्थ के काम का लोड न ले. 

7. विश्लेषण कि आदत 

हमें खुद का विश्लेषण करने का आदत डाल लेना चाहिए. अगर आपको कभी लगता है कि आप बहुत सारे विचारों से घिर गए है तो रिलैक्स होने के लिए कुछ समय का ब्रेक लीजीये. विश्लेषण कि आदत आपको चिंतनशील बनाता है साथ ही साथ आपको विचारों पर नियंत्रण रखना भी सिखाता है. 

8. सब्र रखे.

आजकल  सबके मन में एक अजीब से होड़ लगी है जल्दी पाने कि. आज हर कोई जल्दी से जल्दी सफलता पाना चाहता है. बड़ा आदमी बनना चाहते है. रातो-रात अमीर होने का सपना देखता है. हमेशा याद रखिये- दुनिया में किसी को भी एक दिन में प्रसिद्धि नहीं मिली है. जो भी कार्य करें उसमें सब्र रखे. इससे आप ओवर थिंकिंग से बच जायेंगे. Also read - धैर्य की कहानी 
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चिंता सरल काम को भी कठिन बना देती है. 
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