कहीं आप भी ओवरथिंकिंग के शिकार तो नहीं ? OVERTHINKING IN HINDI.

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Overthinking  से मतलब है जरुरत से ज्यादा सोचना. आज की स्थिति में  हर 10 में से 6 लोग ओवरथिंकिंग (Overthinking) के शिकार है. एक रिसर्च के अनुसार ये ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है.
कहीं  आप भी ओवरथिंकिंग के शिकार तो नहीं

किसी बात और समस्या के बारे में सोचना गलत नहीं है.  मानव के पास सबसे बड़ा गुण है सोचने कि ताकत. लेकिन किसी भी बात पर जरुरत से ज्यादा सोचना बिलकुल गलत है. ज्यादा सोचना आज एक घातक बीमारी कि तरह उभर कर सामने आ रहा है. आज मैं आपको ऐसे  Overthinking  से ग्रसित रोहन की कहानी बता रहा हूँ. 
ज्यादा सोच  (Overthinking)- एक चुम्बक है जो आपके जीवन में कई समस्याओं को अपनी ओर खींचता है.

ओवर थिंकिंग के शिकार रोहन (Overthinking Victim Rohan)

रोहन किसी न किसी बात को लेकर बहुत सोचता रहता है. आज वह देर से उठा. उठाने के बाद भी बिस्तर पर बैठे-बैठे कुछ सोच रहा था. अपनी सोच में इतनी तल्लीन था की उसे पता नहीं चला की वो ऑफिस के लिए लेट हो गया है. 
रोहन  जल्दी से बिना नाश्ता किये ऑफिस के लिए भागता है. जैसे-तैसे करके बस पकड़ता है. बस में टिकट कंडक्टर से भी चिल्डर के नाम में झगड़ जाता है. रोहन बहुत उलझन में रहता है. किसी न किसी बात को लेकर कुछ सोच विचार करते रहता ही है. इसी सोच विचार के कारण वो अपना बैग बस में भूल जाता है. 
ऑफिस जाने के बाद उसे पता चलता है की वो तो अपना बैग ही बस में भूल गया.इस बात के लिए रोहन फिर से तनाव में आ जाता है. उसके बाद  रोहन किसी बात को लेकर सोचने लग जाता है. अचानक उसका बॉस उसके पास आकर उससे प्रोजेक्ट के बारे में पूछता है. प्रोजेक्ट पूरा न होने कारण बॉस रोहन को नौकरी से निकालने की धमकी देता है. 
रोहन का तनाव बढ़ता ही जा रहा था. घर जाते समय वो ज्यादा चिंतित और सोच में डूबा था. उसे अपना बैग तो वापस मिल जाता है लेकिन ज्यादा सोच से उसे सर में बहुत तेज दर्द होता है. घर पहुंचकर किसी से कोई बात नहीं किया. सर दर्द और Overthinking के कारण वो अलग दुनिया में खो गया. बच्चे ने होमवर्क में मदद के लिए कहा तो उसे डांटकर  भगा दिया. पत्नी ने खाने के लिए बुलाया तो उसे भी डांट दिया कि बाद में खा लूंगा. इस तरह परिवार के सब लोगों उलझने लगा था. देर रात तक टी.वी. के सामने बैठ कर अपने सोच में डूबा रहता है. 
दोस्तों रोहन कोई और नहीं हम या आप ही है. आजकल  ज्यादातर लोग रोहन जैसा ही जीवन जी रहे है. ऐसे लाइफ के जिम्मेदार सिर्फ ओवर थिंकिंग (Overthinking) है. 


ओवर थिंकिंग के कारण( Reason for Overthinking)

लोगों के ओवर थिंकिंग के शिकार होने के कई कारण है. कुछ प्रमुख कारण है जिनके कारण लोग धीरे-धीरे ओवर थिंकिग के शिकार हो जाते है-

  1. लोगों कि इच्छा कि पूर्ति न होना. जैसे मनचाहे काम का न मिलाना. ऑफिस या सोसाइटी में ज्यादा इज्जत न होना. 
  2. वर्क लोड(work load), मशीनी युग ने एक तरह हमारे काम को आसान किया है वही दूसरी ओर काम का प्रेशर बड़ा दिया है. एक समय में एक काम को करते हुवे भी हमारा दिमाग दूसरे काम को सोचता रहता है. 
  3. जीवन स्तर का महंगा होना. आज कि Life-Style बहुत महँगी हो गयी है. एक जॉब करते हुवे आसानी से जीवन चलाना अब संभव नहीं है. इसलिए लोग एक साथ कई जॉब  के बारे में ज्यादा सोचने लगता है और जीवन में काम के बोझ को बढ़ाते है. नतीजन ज्यादा सोच का पैदा होना. 
  4. दुसरो के जीवन का अनुकरण. कई बार हम खुद को क्या चाहिए ये दुसरो के देखकर निर्णय लेते है. अगर पड़ोसी के पास कार है तो हम भी लेते है. दुसरो का अनुकरण कि आदत आपको ज्यादा सोच के लिए मजबूर कर देती है. 
  5.  कम्पटीशन (Competition) का दौर में हर कोई हर किसी से आगे निकलना चाहता है. इसी आगे निकालने कि होड़ में वह  ओवर थिंकिंग के शिकार हो जाते है. 
  6.  जीवन में जल्दी सफल होने कि इच्छा. लोगों के पास सब्र (Patience) नहीं है. हर कोई रातो-रात सफल होना चाहते है. रातो-रात आमिर बनाना चाहता है. इन सब के कारण ही वह ओवर थिंकिंग शिकार होते जाते है.

ओवर थिंकिंग के नुकसान (Loss of Overthinking)

Overthinking  के वजह से रोहन अपने दैनिक लाइफ में कितना डिस्टर्ब रहता है. अपने जीवन  का कोई मजा नहीं  ले पाता है . ऐसे ही Overthinking  के कई भयंकर नुकसान है. 
  1. Overthinking हमारे दिमाग को फालतू के बातों से भर देता है जिनका हमारे जीवन से ज्यादा लेना देना नहीं होता है.
  2. Overthinking  धीरे-धीरे हमारे मन से सकारात्मक चीजों को ख़त्म करते जाता है और हमें पूरी तरह नकारात्मक इंसान बना देता है और  हमें जीवन में सिर्फ निराशा ही दिखाई देता है. 
  3. ओवर थिंकिंग कि वजह से हमारा ध्यान भी भंग हो जाता है. हममें धीरे-धीरे भुलाने कि बीमारी आती जाती है और हम छोटी-छोटी  और  जरुरी बातों को भी भूल जाते है. 
  4. Overthinking कि वजह से व्यक्ति अकेलेपन का शिकार हो जाता है. वह न तो समाज और न दोस्तों से अच्छे सम्बन्ध रख पाता है.  
  5. ज्यादा सोचने के कारण हमें कई तरह के शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है. जैसे -भूख न लगना, नींद न आना, सर दर्द होना,चिड़चिड़ापन आदि. 
  6. ओवर थिंकिंग धीरे-धीरे अवसाद (Depression) में बदल जाता है और इसके शिकार व्यक्ति खुद के जीवन को ख़त्म करने की कोशिश भी करने लग जाते है. 
ज्यादा सोच(Overthinking) से कैसे बचें अगले पोस्ट में पढ़े...
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