नकारात्मक सोच के दुष्परिणाम । Effect of Negative Thinking in Hindi

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एक बात हमेशा कहा जाता  है कि नकारात्मक सोच (Negative  Thinking  ) से हमेशा दूर रहे. जब भी मन में किसी  प्रकार के नकारात्मक विचार आये तो तुरंत उसे मन से निकाल  दीजिये.
नकारात्मक विचार विष का ही अन्य रूप है जो धीरे-धीरे आपके प्राण ले लेता है. 

nakaratmak soch ke dushparinam
नकारात्मक सोच  के दुष्परिणाम
क्या है नकारात्मक विचार ? What is Negative Thought?

नकारात्मक विचार से तात्पर्य ऐसे विचारों से जो आपके जीवन में गलत प्रभाव डालते है. जीवन के प्रति गलत विचारों को अपना लेना और उन्ही विचारो के अनुरूप जीवन जीना शुरू कर देना और  स्वयं को गलत विचारों के घेरे में कैद कर लेना ही नकारात्मक विचार है.  

नकारात्मक सोच  के दुष्परिणाम  The Consequences of Negative Thinking

हम अक्सर सोचते है कि ज्यादा से ज्यादा क्या होगा. नकारात्मक विचार से मर तो नहीं जायेंगे. नकारात्मक विचारों के परिणाम कितने भयंकर होते है, आपके सोच से भी परे हो सकता है. नकारात्मक विचार इंसान को धीरे-धीरे खोखला करता  है जिससे उनका जीवन के प्रति मोह टूट  जाता है और वह स्वंय के  जीवन को ही समाप्त  कर देता है.  नकारात्मक विचार  की एक  जानलेवा घटना शेयर कर रहा हूँ. 



एक सच्ची   घटना

रमेश और विजय नाम के दो दोस्त रहते है.  विजय को अपने भविष्य जानने कि इच्छा हुआ और वह एक प्रसिद्द ज्योतिष (Asrologer ) के पास गया. ज्योतिष ने विजय का हाथ देखा और कहा कि तुम्हारे गृह-नक्षत्र तुम्हारे  अनुकूल नहीं है और तुम्हार दिल भी बहुत कमजोर है. कमजोर दिल के कारण आने वाली पूर्णिमा कि रात को दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से तुम्हारी मौत हो जाएगी. 
विजय ज्योतिष कि बात सुन चौक गया. उसका चेहरा  पीला पड़ गया और गहरी सोच में डूब गया है. विजय ने ज्योतिष कि बात को पत्थर कि लकीर मान कर उस पर पूरी तरह से विश्वास कर लिया, मानो स्वंय भगवान कह रहे हो. विजय पूरी तरह से व्याकुल और चिंतित हो गया. रमेश ने  उसे समझाने कि कोशिश की लेकिन वह  अपने ही विचारों की दुनिया में में खो गया था. 
घर जाकर विजय सबको ज्योतिष की भविष्यवाणी (Prediction)  बताता है और जब रमेश उसे दुबारा समझाने की कोशिश करता है तो विजय ने कहा कि- वह बड़े ज्योतिष है उनकी भविष्यवाणी कभी भी झूठी नहीं होती है और उनके भविष्यवाणी के अनुसार आने वाली पूर्णिमा को वह जरूर मर जायेगा. 
जैसे-जैसे दिन बितते गए विजय उदास और बीमार रहने लगा. एक हँसता हुवा इंसान आज दुःखी और बीमार रहने लगा है सिर्फ एक भविष्यवाणी कि वजह से. उस दिन रमेश ने देखा कि एक नकरात्मक विचार (negative thought) कैसे किसी के जीवन को बदलकर उसके जिंदगी में जहर घोल देता है.  एक खुशहाल  इंसान को भी दुःखी बना सकता है.  आखिर वो अशुभ दिन आया. पूर्णिमा कि रात को सच में विजय को बुरी तरह हार्ट अटैक हुआ और वो मर गया. शायद विजय को पता ही नहीं था कि उसकी मौत का जिम्मेदार वह स्वयं था ना कि भविष्यवाणी. 
विजय ने खुद कि जान ली थी. विजय ने एक नकारात्मक विचार को अपने मन में बैठा लिया और उसी को जीने लगा. ज्योतिष ने जो एक नकारात्मक विचार  दिया था उसे सच मानकर अपने मन-मस्तिष्क में बैठा लिया. परिवार के सभी लोगो को बताकर उसके बातो में विश्वास दिखाया और खुद ही मरने कि तैयारी  करने लगा. उस एक विचार पर विश्वास और मरने कि डर को  अवचेतन मन ने सही मान लिया और हकीकत में बदल दिया. 



स्वयं से एक सवाल ?

आप स्वयं से सवाल करेंगे और अगर आप गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि दूसरों के ऐसे नकारात्मक विचारों में कोई शक्ति नहीं होता है. हम लोग खुद ही ऐसे गलत विचारों को बार-बार सोचकर उसे शक्ति प्रदान करते है. बार-बार सोचने से उस विचार को अवचेतन मन सच मान लेता है इसलिए कभी भी ऐसे आत्मघाती या जानलेवा विचारों को सोचकर शक्ति प्रदान ना करे.कोशिश करें कि किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों को जल्द से जल्द मन से निकाल दे.
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