सोच का पाइजन । Soch ka Poison in Hindi

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सोच का पाइजन(Soch ka Poison)  सुनने में अजीब लगता है. क्या  सोच में भी जहर हो सकता है ? इसका जवाब है -हाँ. सोच भी जहरीला हो सकता है और यह उतना ही जानलेवा हो सकता है जितना कि एक जहर.
soch ka poison in hindi
सोच का पाइजन
सोच के पाइजन से तात्पर्य है नकारात्मक सोच से. जिस प्रकार अच्छे भोजन करने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और हम ताकतवर बनते जाते है लेकिन अगर दूषित भोजन करे तो हमारा शरीर धीरे-धीरे कमजोर होते जाता है और हम बीमार हो जाते है. यदि विषैला भोजन या कोई चीज  खा  ले तो हमारी मौत भी हो  जाती है. ठीक ऐसे ही नकारात्मक सोच से हमारे शरीर में जहरीला तत्व पैदा होता है जो धीरे-धीरे हमारे हमारे प्राण ले लेते है.
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सोच का पाइजन( Soch ka Poison)



अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इंसान के सोच के पाइजन को चेक करने के लिए  एक प्रयोग किया और जो परिणाम सामने आये वो वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देने वाला था. वैज्ञानिक अचंभित थे कि मात्र सोच से इंसान का शरीर इतना पाइजन उत्पन्न  कर सकता है मानो इंसान ने  सचमुच किसी प्रकार का कोई जहर का सेवन किया हो. आप भी जानकर हैरान हो जायेंगे कि सिर्फ  मानव कि सोच ही पाइजन बनकर उसके प्राण ले सकते है.


एक कैदी को फांसी कि सजा

अमेरिका के एक कैदी को फांसी कि सजा सुनाई जाती है. कैदी के फांसी पर प्रयोग करने के बारे में सोचा.  वैज्ञानिकों ने कैदी से मिलकर बताया कि उसे फांसी देने के बजाय एक जहरीला  कोबरा सांप से डसाया  जायेगा. इसके बाद उस कैदी के सामने बड़ा सा जहरीला कोबरा सांप लाया गया और उस कैदी के आँखों में पट्टी बांध दिया गया और उसे सांप से न डसाकर सिर्फ 2 सेफ्टी पिन से चुभाया गया. कुछ सेकंड बाद उस कैदी कि दर्दनाक मौत हो जाती है जिसमे उसके मुँह से सांप काटने जैसे झाग भी निकल रहा था.  जब कैदी के बॉडी का पोस्टमॉर्टेम किया गया तो उसके शरीर में सांप के जहर के समान ही जहर था.


सोच से उत्पन्न होता एक पाइजन 



अब सवाल ये उठता है ये पाइजन उसके शरीर में कहा से आया जो उस कैदी का जान ले लिया . वो पाइजन उस कैदी के शरीर ने सदमे के समय खुद उत्पन्न  किया था. कैदी को सेफ्टी पिन चुभने से अहसास हो गया कि उसे सचमुच किसी जहरीले सांप ने डस लिया है और उसी सोच के कारण उनका शरीर पाइजन उत्पन्न करना शुरू कर दिया.
हमारे हर संकल्प से एक पॉजिटिव या निगेटिव एनर्जी पैदा होता है और वो हमारे शरीर में उसी के अनुसार Hormones उत्पन्न करती है. हमारे शरीर के 80 % बीमारियों का कारण हमारे नेगेटिव सोच के एनर्जी के कारण ही है. आज इंसान खुद के सोच से अपने आपको भयंकर नुकसान पंहुचा रहा है जितना शायद ही कोई उसे पंहुचा सकता हो. खुद ही सोच से भस्मासुर बनकर खुद का विनाश कर रहे है. अपनी सोच सदैव सकारात्मक रखे और खुश रहे. जीवन भर सोच के पाइजन के कुछ नमूने-

25 साल की  उम्र तक हमें कोई परवाह नहीं होता कि - "लोग क्या सोचेंगे?"
50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते है कि - "लोग क्या सोचेंगे?"
50 साल कि उम्र के बाद हमें पता चलता है - "लोग हमारे बारे में सोच ही नहीं रहे थे"

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